Monday, 7 April 2014

आज युहीं अचानक बैठे हुए

 

आज युहीं अचानक बैठे हुए ,

खोली जिन्दगी की  एक पुरानी किताब , खोले कुछ पन्ने ,

जिनमें बसा था वो प्यारा सा बचपन ,

वो बचपन की  अठखेलियाँ , वो सुकूँ की हॅसी  ,

थी बहुत ही बेफिक्री , बहुत ही  लापरवाही,



जिनमें दबे थे कुछ सपने , जो देखे थे कभी ,

सपने कुछ बनने के , कुछ कर गुजरने के ,

जिनमें बसी थी कुछ यादें ,

यादें उन दोस्तों की  , उन शरारतों की ,

उन मस्ती भरी बातों की  , 



आज युहीं अचानक बैठे हुए , 

खोली जिन्दगी की एक पुरानी किताब , खोले कुछ पन्ने , 

जिनमें छुपे थे कुछ ख्वाब , जो देखे थे कभी, 

ख्वाब किसी के साथ के,ख्वाब किसी के प्यार के,


जिनमें कैद थे कुछ लम्हें , जो बिताए थे किसी के साथ ,

लम्हें वो इकरार के , लम्हे वो इजहार के ,

लम्हें वो तकरार के , लम्हें किसी के प्यार के ,

बस आज युहीं अचानक बैठे हुए ,

खोली जिन्दगी की एक पुरानी किताब में कैद मेरी जिन्दगी…  

 

Hinglish Version







2 comments:

  1. Enjoyed reading it.... :)

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thanks Amit ji.. :) It means a lot when it comes from you. :)

      Delete