आज युहीं अचानक बैठे हुए
आज युहीं अचानक बैठे हुए ,
खोली जिन्दगी की एक पुरानी किताब , खोले कुछ पन्ने ,
जिनमें बसा था वो प्यारा सा बचपन ,
वो बचपन की अठखेलियाँ , वो सुकूँ की हॅसी ,
थी बहुत ही बेफिक्री , बहुत ही लापरवाही,
जिनमें दबे थे कुछ सपने , जो देखे थे कभी ,
सपने कुछ बनने के , कुछ कर गुजरने के ,
जिनमें बसी थी कुछ यादें ,
यादें उन दोस्तों की , उन शरारतों की ,
उन मस्ती भरी बातों की ,
आज युहीं अचानक बैठे हुए ,
खोली जिन्दगी की एक पुरानी किताब , खोले कुछ पन्ने ,
जिनमें छुपे थे कुछ ख्वाब , जो देखे थे कभी,
ख्वाब किसी के साथ के,ख्वाब किसी के प्यार के,
जिनमें कैद थे कुछ लम्हें , जो बिताए थे किसी के साथ ,
लम्हें वो इकरार के , लम्हे वो इजहार के ,
लम्हें वो तकरार के , लम्हें किसी के प्यार के ,
बस आज युहीं अचानक बैठे हुए ,
खोली जिन्दगी की एक पुरानी किताब में कैद मेरी जिन्दगी…
Enjoyed reading it.... :)
ReplyDeleteThanks Amit ji.. :) It means a lot when it comes from you. :)
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